गरीब कल्याण प्राथमिकता;केंद्रीय मंत्री अमित शाह

Hariyana

(गुरुग्राम,हरियाणा)08जून,2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना और जन-धन योजना जैसी केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ने करोड़ों लोगों को बैंकिंग सुविधाओं और वित्तीय सुरक्षा से जोड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने के अवसर पर उन्होंने यह बात कही।

“करोड़ों लोगों को बैंकिंग सुविधाओं और स्वरोजगार से जोड़ा”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शाह ने कहा, ‘गरीब कल्याण’ मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, गरीब कल्याण के 12 वर्षों में सरकार ने अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जन-धन योजना, मुद्रा ऋण योजना और पीएम स्वनिधि जैसी कल्याणकारी योजनाओं के जरिये करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग सुविधाओं, वित्तीय सुरक्षा और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा है।

गृह मंत्री ने कहा, बुनियादी ढांचे, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर जीवन स्तर के जरिये देश के गरीबों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़कर ‘विकसित भारत’ की मजबूत नींव रखी जा रही है।

यमुना से जुड़े मुद्दों पर समीक्षा बैठक में क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में यमुना को पुनर्जीवित करने और सफाई से जुड़े मुद्दों पर समीक्षा बैठक भी की।
बैठक में उन्होंने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों के साथ-साथ संबंधित मंत्रालयों से अपील की कि वे अलग-अलग नहीं, बल्कि एकीकृत कार्ययोजना के तहत एक टीम के रूप में काम करें, ताकि यमुना को स्वच्छ बनाया जा सके।
अमित शाह ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त यमुना हमारा संकल्प है और इस लक्ष्य को जल्द से जल्द हासिल करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
यमुना में डेयरियों का कचरा जाने से रोकने के लिए गृह मंत्री ने कहा कि दिल्ली नगर निगम और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच एक समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके तहत डेयरी अपशिष्ट को बायोगैस और जैविक खाद में बदला जाएगा।

उन्होंने कहा कि एनडीडीबी मॉडल के तहत डेयरियों और गौशालाओं से निकलने वाले गोबर को सीधे गैस और खाद संयंत्रों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही यमुना के किनारों पर जमा कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, यमुना में गिरने वाले नालों की गाद निकालने का काम तेजी से चल रहा है।

मंत्रालय ने बताया कि इस वर्ष 28.57 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 97 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष गाद को 15 जून तक हटा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निकाली गई गाद का उपयोग विभिन्न निर्माण और विनिर्माण परियोजनाओं में किया जाना चाहिए, ताकि बरसात के दौरान वह दोबारा यमुना में न बह सके।

बैठक में बताया गया कि अब तक दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 128 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा, वर्ष 2027 के अंत तक 99 नए एसटीपी स्थापित किए जाएंगे।

केवल संतोषजनक काम करना पर्याप्त नहीं: शाह
अमित शाह ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, औद्योगिक अपशिष्ट और नालों से निकलने वाले पानी की लगातार निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल संतोषजनक कार्य करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सटीक और मापने योग्य परिणाम प्राप्त करने पर ध्यान देना होगा।

उन्होंने निर्देश दिया कि सभी औद्योगिक अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र(सीईटीपी) और डेयरी अपशिष्ट शोधन संयंत्र भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जाएं। साथ ही यमुना में मिलने वाले सभी नालों और जल स्रोतों में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (सीओडी) और टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (टीएसएस) जैसे शुद्धिकरण मानकों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए।

गृह मंत्री ने यमुना पुनर्जीवन परियोजना के तहत सभी कार्यों के लिए विस्तृत कार्ययोजना और समयसीमा तय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यमुना पुनर्जीवन परियोजना की प्रगति की समीक्षा हर 20 दिन में करने का निर्देश दिया(साभार एजेंसी)

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