(रांची,झारखण्ड)25अगस्त,2026
झारखंड सरकार ने राज्य में वेटलैंड संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला लिया है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में एलीफेंट पैसेज की विशेष व्यवस्था का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री सोमवार को झारखंड प्रतिकरात्मक वनरोपण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैम्पा) और राज्य प्राधिकरण की शासी निकाय की पहली बैठक को संबोधित कर रहे थे।
योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने का निर्देश:
सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को कैम्पा मद से संचालित सभी योजनाओं का ससमय क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के अनुरूप और पूरी पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव वन क्षेत्रों, ग्रामीण आबादी और स्थानीय समुदायों के जीवन में दिखाई देनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
पौधरोपण के बाद नियमित निगरानी और संरक्षण का निर्देश:
वन क्षेत्रों में पौधरोपण और उसके संरक्षण, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण तथा पर्यावरणीय पुनर्स्थापन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पौधरोपण के बाद उसकी नियमित निगरानी और संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित हो, ताकि लगाए गए पौधे वृक्ष का रूप ले सकें और कैंपा के उद्देश्य वास्तविक रूप से धरातल पर साकार हों। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वानरोपण कार्यक्रम में वैसे पौधों का उपयोग करें जो मानव तथा वन्य जीव दोनों के लिए कारगर सिद्ध हो। उन्होंने वनरोपण के दौरान औषधीय वृक्षों के पौधे लगाए जाने का निर्देश अधिकारियों को दिया। मुख्यमंत्री ने मृदा-सह-जल संरक्षण पर विशेष बल दिए जाने की बात कही।
सभी हाथी कॉरिडोर की सूक्ष्मता के साथ हो मैपिंग
सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर सभी हाथी कॉरिडोर की सूक्ष्मता के साथ मैपिंग कराई जाए। यह सुनिश्चित हो कि हाथियों और अन्य वन्यजीवों के आवागमन में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो और उनके पारंपरिक कॉरिडोर किसी भी स्थिति में बाधित न हों। कॉरिडोर में आ रही समस्याओं और संवेदनशील क्षेत्रों की विस्तृत मैपिंग करते हुए आवश्यकतानुसार एरिया डिमार्केशन किया जाए तथा वन्यजीवों के आवास एवं आवागमन वाले क्षेत्रों को अनावश्यक रूप से डिस्टर्ब न किया जाए। मुख्यमंत्री ने वन क्षेत्रों में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का चयन किया जाए। उन्होंने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा।
विकास कार्यों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन हो:
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में क्रशर संचालन, जंगल क्षेत्रों में कोयला मिलने तथा उत्खनन जैसी गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और आवागमन प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में विकास कार्यों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन कायम करते हुए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि हाथी कॉरिडोर वाले क्षेत्रों में यदि सड़क निर्माण आवश्यक हो तो एलिवेटेड रोड जैसी तकनीक का उपयोग किया जाए, ताकि हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों के आवागमन में बाधा न आए। साथ ही, वन्यजीवों के लिए पसंदीदा एवं उपयोगी खाद्य प्रजातियों के पौधों का अधिकाधिक रोपण कराया जाए, ताकि उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सके(साभार एजेंसी)
