उपचार की सभी पद्धतियों का हो एकीकरण:राज्यपाल उ.प्र.

Uttar Pradesh

(लखनऊ,UP)15अक्टूबर,2025.

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के मुताबिक आयुर्वेद देश की प्राचीन उपचार पद्धति है। ऐलौपैथ डॉक्टरों को आयुर्वेद के साथ ही होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय उन्हें इनका प्रसार करना चाहिए। मौका था मंगलवार को गोमतीनगर स्थित इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में आयोजित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के दूसरे दीक्षांत समारोह का।

दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों का एकीकरण होगा तो मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और भीड़ भी कम होगी। समस्या यह है कि डॉक्टर एक दूसरे की चिकित्सा पद्धतियाें को नीचा दिखाने में लगे हुए हैं। सरकार को प्रयास करके सभी को एक साथ बिठाना चाहिए। इससे उनमें तालमेल बढ़ेगा। आयुष में मौजूद कई दवाओं में उन रोगों का उपचार है जिनका अभी भी सटीक इलाज एलोपैथ में नहीं है। राज्यपाल ने आगे कहा कि चिकित्सा संस्थान सिर्फ उपचार का स्थल नहीं हैं। इन्हें उपचार के साथ ही करुणा का केंद्र भी बनना होगा। संस्थान के उपाध्यक्ष और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने सभी का स्वागत किया। संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने वार्षिक रिपोर्ट पेश की।

विस्तार के लिए जल्द मिलेगी जमीन

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लोहिया संस्थान को गामा नाइफ मशीन के साथ ही आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। संस्थान के विस्तार के लिए दूरदर्शन की भूमि मिलने की प्रगति के बारे में भी बताया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि 40 हजार वर्ग फीट भूमि लोहिया संस्थान को देने संबंधी फाइल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास पहुंच चुकी है। जल्द ही इस पर सहमति बन जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगला दीक्षांत समारोह संस्थान अपने सभागार में आयोजित करेगा। पर्यावरण का स्तर लगातार खराब हो रहा है। इसलिए इसके संरक्षण की जरूरत है। ऐसी नीति बनाई जा रही है कि सरकारी भवनों में प्राकृतिक रोशनी पहुंचे और दिन में लाइट न जलानी पड़े। इस मौके पर चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने मेडल व उपाधि पाने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मेडिकल सेवा भाव का पेशा है। इसको हमेशा ध्यान रखें।

उठो जागो और कर्म करते रहो
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भूगोल एवं सांस्कृतिक भूगोल और हेरिटेज स्टडीज के पूर्व प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष प्रो. राणा पीवी सिंह ने अपने भाषण की शुरुआत विभिन्न संयोगों से की। उन्होंने कहा कि मंच पर पांच पुरुष और एक महिला मौजूद हैं। यह पंच तत्व और इनको ऊर्जा देने वाली आदिशक्ति गायत्री का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह भी संयोग है कि लोहिया संस्थान का दीक्षांत समारोह तिथि के हिसाब से उनकी पुण्य तिथि के दिन ही हो रहा है। अंत में उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उपदेश- उठो जागो और कर्म करते रहो, रहो के साथ अपनी बात समाप्त की।(साभार एजेंसी)

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