(गुवाहाटी,असम)27जून,2026.
असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि असम में छोटे चाय उत्पादक अब किसान पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकरण करा सकेंगे। इसके साथ ही एक ही मंच के माध्यम से सरकार की ओर से दिए जाने वाले अलग-अलग लाभों का फायदा उठा सकेंगे।
किसानों को किसान आईडी जारी की जाएगी
उन्होंने कहा कि किसानों को किसान आईडी जारी की जाएगी। जिससे वे उर्वरक, सरकारी योजनाओं के लाभ, बेहतर शर्तों पर संस्थागत कर्ज और अन्य कृषि सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि चाय क्षेत्र उद्योग विभाग के अधीन ही रहेगा। लेकिन इस कदम से छोटे चाय उत्पादकों को कृषि विभाग की ओर से दी जाने वाली लाभ भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री हिमंता ने क्या बताया?
सरमा ने शुक्रवार रात सोशल मीडिया पोस्ट में कहा ‘आज असम के लाखों छोटे चाय उत्पादकों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। चाय और बागान श्रेणी की भूमि जोत अब किसान पंजीकरण पोर्टल में शामिल कर ली गई है।’ मुख्यमंत्री ने इस पहल को परिवर्तनकारी बताता। उन्होंने कहा कि किसान पहचान प्रणाली उर्वरकों की समय पर और जरूरत के हिसाब से उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, एक ही मंच के माध्यम से सरकारी योजनाओं तक पहुंच प्रदान करेगी, संस्थागत ऋण को आसान बनाएगी और चाय उत्पादकों के शोषण में बिचौलियों की भूमिका को कम करेगी।
किसानों ने असम चाय की पहचान को मजबूत किया
उन्होंने कहा, ‘यह चाय उत्पादक समुदाय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो अब एक ही मंच के माध्यम से सरकार के सभी लाभों का आनंद ले सकते हैं।’ कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि इस फैसले से असम के छोटे चाय उत्पादकों को बहुत जरूरी सहायता मिलेगी, जो अब राज्य के चाय उत्पादन में लगभग आधा योगदान देते हैं। उन्होंने एक पोस्ट में कहा, ‘कई पीढ़ियों से, असम के छोटे चाय उत्पादक किसानों ने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण के माध्यम से असम चाय की पहचान को मजबूत किया है।’
हजारिका ने कहा कि किसानों के पंजीकरण पोर्टल में चाय और बागान श्रेणी की भूमि को शामिल करने से पात्र उत्पादकों को किसान आईडी प्राप्त करने और सरकारी सहायता का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा, ‘अब हमारा ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि प्रत्येक पात्र छोटे चाय उत्पादक को इस डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में सहजता से एकीकृत किया जाए और उन्हें वह समर्थन मिले जिसके वे हकदार हैं।’ भारतीय चाय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च, 2025 तक असम में 1,33,864 छोटे चाय उत्पादक 1,26,107.64 हेक्टेयर भूमि पर चाय की खेती कर रहे थे(साभार एजेंसी)
