(पटना,बिहार)07जुलाई,2026
बिहार सरकार ने राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब राजस्व न्यायालयों में किसी भी मामले की सुनवाई के दौरान आवेदक या विपक्षी से कोई भी भौतिक (कागजी) दस्तावेज या साक्ष्य स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी साक्ष्य केवल राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।
सुनवाई से लेकर फैसले तक पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन:
विभाग के सचिव जय सिंह ने राज्य के सभी समाहर्ताओं, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं और अंचल अधिकारियों को जारी निर्देश में कहा है कि आरसीएमएस के तहत दायर मामलों में वाद दायर करने से लेकर अंतिम आदेश जारी करने तक पूरी न्यायिक प्रक्रिया ऑनलाइन ही संचालित की जाएगी।
विभाग को जानकारी मिली थी कि कई स्थानों पर सुनवाई के दौरान अब भी पक्षकारों से कागजी दस्तावेज लिए जा रहे थे, जबकि यह निर्धारित व्यवस्था के विपरीत है। इसे गंभीरता से लेते हुए ऐसे दस्तावेज स्वीकार करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
जरूरत पड़ने पर पोर्टल पर ही अपलोड करने होंगे अतिरिक्त दस्तावेज:
नए निर्देश के अनुसार, यदि किसी मामले में सुनवाई के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य या दस्तावेज की आवश्यकता होगी, तो संबंधित पक्षकारों को केवल आरसीएमएस पोर्टल पर ही उन्हें अपलोड करना होगा। न्यायालय भी केवल पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही मामले का निपटारा करेंगे।
डिजिटल रिकॉर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता:
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राजस्व न्यायालयों को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिक हितैषी बनाना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था से पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और भ्रष्टाचारमुक्त बनेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी स्तर पर भौतिक दस्तावेज लेने की आवश्यकता नहीं है और सभी अधिकारी इस व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
आम लोगों को होगा सीधा फायदा
विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी दस्तावेज डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे, जिससे रिकॉर्ड में छेड़छाड़ या विवाद की संभावना भी कम होगी। इसके साथ ही समय और खर्च दोनों की बचत होगी तथा न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा(साभार एजेंसी)
