सभी रेलवे,बिजलीघरों,फैक्ट्रियों में “ट्रीटेड वॉटर”

Uttar Pradesh

(लखनऊ,UP)24जुलाई,2026

अब तक जो पानी नालों और नदियों में बहा दिया जाता था, वहीं अब उद्योगों, बिजलीघरों और रेलवे की जरूरतें पूरी करेगा। योगी सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों से निकलने वाले ट्रीटेड वॉटर के दोबारा इस्तेमाल को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। सभी विभागों को इसे अपनी कार्ययोजना का हिस्सा बनाना होगा। इसके लिए उन्हें नियम बदलाव करने के निर्देश शासन स्तर पर दिए गए हैं। रेलवे, बिजली उद्योग एवं अन्य व्यवसायिक गतिविधियों में इसके उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

प्रदेश में एक तरफ भूजल पर दबाव बढ़ रहा है, दूसरी ओर हर दिन लाखों लीटर ट्रीटेड वॉटर बिना किसी उपयोग के व्यर्थ हो जाता है। पर्यावरण संरक्षण एवं संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए अब हर विभाग को ट्रीटेड वॉटर के इस्तेमाल को पॉलिसी में शामिल करना होगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी अहम विभागों के साथ बैठक कर उन्हें इस प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

उपयोग का बनेगा जीआईएस आधारित मैप:
ट्रीटेड वॉटर के सही उपयोग एवं इसकी संभावना तलाशने के लिए सभी एसटीपी और जगहों का जीआईएस आधारित नक्शा तैयार किया जाएगा, जहां इस पानी का उपयोग किया जा सकता है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) पहले चरण में सभी 17 नगर निगमों के लिए शहर स्तर की कार्य योजना तैयार करेगा। ट्रीटेड वॉटर के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य और जिला स्तर पर अलग-अलग समितियां बनाने का भी प्रस्ताव है। इसके लिए एसटीपी संचालकों और पानी का उपयोग करने वाली संस्थाओं के बीच सर्विस लेवल एग्रीमेट भी किया जाएगा।

वाराणसी,आगरा, प्रयाग में योजना तैयार
एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि रेलवे में भी प्रयागराज जंक्शन, रेलगांव और सुबेदारगज स्टेशनों पर गैर-पेयजल जरूरतों के लिए ट्रीटेड वॉटर इस्तेमाल करने के प्रस्ताव भेजे है। वाराणसी, आगरा और प्रयागराज के लिए शहर स्तरीय पुनः उपयोग योजनाएं तैयार हो चुकी है, जबकि कानपुर की योजना बनाई जा रही है।

गंगा पल्स पोर्टल के जरिए होती है एसटीपी की निगरानी
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के ‘गंगा पल्स पोर्टल के जरिए हर एसटीपी की निगरानी की जाती है। इस पोर्टल पर हर 10 मिनट में पानी की गुणवत्ता का डेटा उपलब्ध होता है। इसके जरिए निर्धारित मानकों के अनुरूप पानी ही उपयोग की मॉनिटरिंग होगी। भविष्य में एसटीपी की डीपीआर में ट्रीटेड वॉटर के उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं और संभावित उपयोगकर्ताओ को भी शामिल किया जाएगा।

उद्योगों में उपयोग पर खास जोर
पॉलिसी में सबसे अधिक जोर उद्योगों में इसके इस्तेमाल पर है। इसके साथ ही रेलवे, कृषि, ऊर्जा, सड़क परिवहन, विमानन और अन्य विभागों को भी ट्रीटेड वॉटर के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके सफल उदाहरण भी सरकार के पास हैं। नोएडा क्षेत्र में उपलब्ध 260 एमएलडी ट्रीटेड वॉटर में से 120 एमएलडी का पुनः उपयोग किया जा रहा है और 140 एमएलडी जल को हिंडन नदी में प्रवाहित कर उसकी परिस्थितिकी को सुदृढ़ किया जा रहा है।

80 एमएलडी वॉटर के रियूज की तैयारी
दादरी धर्मल पॉवर प्लाट में भी 80 एमएलडी वॉटर के रियूज की तैयारी है। वहीं, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने मथुरा-वृंदावन के 13 एमएलडी एसटीपी से ट्रीटेड वॉटर के रियूज के लिए इंफास्ट्रक्चर विकसित करने को मंजूरी दी है। इसी कड़ी में राजधानी के पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क को दौलतगंज एसटीपी से 22.5 एमएलडी और वाराणसी के पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क के लिए रमना एसटीपे से 10 एमएलडी ट्रीटेड वॉटर उपलब्ध करवाने की योजना है।(साभार एजेंसी)

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