‘पोलैंड भारत को अपना डिफेंस हब बनाना चाहता है-वित्त मंत्री पोलैंड

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(नई दिल्ली )03अक्टूबर,2026

पोलैंड भारत के साथ रक्षा और औद्योगिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहता है। देश के वित्त और अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमांस्की ने प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की आगामी भारत यात्रा से पहले यह साफ संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि पोलैंड अपनी रक्षा उद्योग को मजबूत करने के साथ-साथ भारत जैसे भरोसेमंद साझेदार के साथ रक्षा उत्पादों का व्यापार बढ़ाना चाहता है। बुधवार को अमेरिका के विस्कॉन्सिन स्थित मिल्वौकी में चल रही जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान डोमांस्की ने इन योजनाओं का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद सामरिक और सुरक्षा क्षेत्रों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहते हैं।“

भारत लाएंगे अपनी डिफेंस कंपनियां

”डोमांस्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम एक मजबूत डिफेंस इंडस्ट्री विकसित करना चाहते हैं। इसके लिए भारत जैसे भरोसेमंद पार्टनर के साथ डिफेंस प्रोडक्ट्स में अच्छे व्यापारिक संबंध बनाए रखना चाहेंगे। इसलिए इसमें कोई हैरानी की बात नहीं कि हम भारत को अपने डिफेंस प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट भी बढ़ाना चाहते हैं। यात्रा के दौरान हम पोलैंड की डिफेंस कंपनियों को भारत लाएंगे।” उन्होंने बताया कि अक्टूबर के आखिर में होने वाली प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की भारत यात्रा बेहद महत्वपूर्ण होगी। इस यात्रा में करीब 100 कंपनियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। टस्क न सिर्फ दिल्ली जाएंगे, बल्कि बेंगलुरु का भी दौरा करेंगे। डोमांस्की खुद भी इस यात्रा में शामिल रहेंगे।

2024 की रणनीतिक साझेदारी पर टिकी नई उम्मीदें

यह आगामी मुलाकात उस मजबूत आधार पर टिकी है, जो अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान बना था। 45 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पोलैंड की यह पहली यात्रा थी। दोनों देशों ने तब अपने संबंधों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक पहुंचाया था। व्यापार-निवेश, रक्षा, ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े पांच साल के व्यापक एक्शन प्लान पर भी सहमति बनी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने टस्क को भारत आने का न्योता दिया था। टस्क इससे पहले 2010 में भारत आ चुके हैं।

जी-20 सदस्यता की दावेदारी और रूस का विरोध

बहुपक्षीय कूटनीति पर बात करते हुए डोमांस्की ने पोलैंड की जी-20 सदस्यता की दावेदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पोलैंड सभी सदस्य देशों से समर्थन मांग रहा है, लेकिन एक देश ऐसा है जो शायद समर्थन नहीं करेगा और वह रूस है।उन्होंने पोलैंड की आर्थिक ताकत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, “पोलैंड अभी यूरोप की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है। हम अच्छे आर्थिक बदलाव का उदाहरण हैं और दूसरे देशों के साथ अपना अनुभव साझा करना चाहते हैं। हमारा मानना है कि हम जी-20 में मध्य और पूर्वी यूरोप की आवाज़ भी बन सकते हैं।”

गौरतलब है कि पोलैंड की यह सक्रियता भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक नया अध्याय खोल सकती है। अक्टूबर की यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा साझेदारी को नई गति देने वाली साबित हो सकती है। (साभार एजेंसी)

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