झारखंड में नई भाषा शिक्षा नीति की तैयारी

Jharkhand

(रांची,झारखंड) 05नवंबर,2026

झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब मातृभाषा के साथ हिंदी और अंग्रेजी में भी बेहतर शिक्षा देने की तैयारी है। नई भाषा शिक्षा नीति में बच्चों की स्थानीय भाषा को महत्व देने के साथ अंग्रेजी बोलने और बातचीत करने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए 12वीं कक्षा पास करने से पहले ही विद्यार्थियों के लिए स्पोकन इंग्लिश की कक्षाएं चलाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा बच्चों की रुचि और प्रतिभा को देखते हुए कौशल आधारित शिक्षा में हॉकी को भी शामिल करने पर विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड मंत्रालय में झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति के प्रारूप पर हुई बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए।

स्कूलों में स्थानीय भाषाओं को भी मिले स्थान – सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में अलग-अलग भाषाएं और संस्कृतियां हैं। यहां के बच्चे घर और अपने समाज में संथाली, मुंडारी, हो, खड़िया, कुड़ुख, नागपुरी, खोरठा, कुरमाली सहित दूसरी स्थानीय भाषाओं में बातचीत करते हैं। वहीं, स्कूलों में पढ़ाई मुख्य रूप से हिंदी या अंग्रेजी में होती है। ऐसे में कई बार बच्चे घर की भाषा और स्कूल की भाषा के बीच तालमेल नहीं बैठा पाते हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई और अपनी बात समझाने की क्षमता पर पड़ सकता है। इसलिए ऐसी शिक्षा नीति तैयार की जाए, जिसमें बच्चे अपनी मातृभाषा में आसानी से पढ़ाई समझ सकें। उनकी स्थानीय भाषा को स्कूलों में भी उचित स्थान मिले।

मातृभाषा के साथ हिंदी और अंग्रेजी पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की भाषाएं यहां की पहचान और संस्कृति से जुड़ी हैं। इन्हें शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है। बच्चों को अपनी मातृभाषा में पढ़ने का अवसर मिले, लेकिन इसके साथ हिंदी और अंग्रेजी सीखने के रास्ते भी खुले रहें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी एक भाषा को हटाकर दूसरी भाषा थोपने के बजाय मातृभाषा के साथ हिंदी और अंग्रेजी को भी पढ़ाई से जोड़ा जाए। इससे बच्चों को एक से अधिक भाषाओं में अपनी बात रखने और आगे की पढ़ाई करने में आसानी होगी।

12वीं से पहले स्पोकन इंग्लिश पर जोर

मुख्यमंत्री ने अंग्रेजी बोलने और बातचीत करने की क्षमता को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि आगे की पढ़ाई, नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और खेल प्रतियोगिताओं के लिए बच्चों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। वहां अलग-अलग लोगों से बातचीत करने की जरूरत होती है। ऐसे में अंग्रेजी बोलने का आत्मविश्वास उनके काम आएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि विद्यार्थी जब तक 12वीं कक्षा पास करें, उससे पहले ही उन्हें अंग्रेजी बोलने और बातचीत करने का अच्छा अभ्यास मिलना चाहिए। इसके लिए स्कूलों में स्पोकन इंग्लिश की उचित व्यवस्था की जाए।

पढ़ाई के साथ खेल और दूसरे हुनर पर भी ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की शिक्षा केवल किताबों और परीक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनकी रुचि, प्रतिभा और काम करने की क्षमता को भी विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कौशल आधारित शिक्षा में हॉकी को शामिल करने पर विचार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के बच्चे और बच्चियां हॉकी में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में स्कूल स्तर पर ही उन्हें हॉकी से जुड़ने और अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिलना चाहिए। इससे खेल में रुचि रखने वाले बच्चों को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

तीन चरणों में होगी भाषा की पढ़ाई की व्यवस्था

बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति तैयार करने के लिए वर्ष 2025 में एक समिति बनाई गई थी। समिति ने झारखंड के साथ दूसरे राज्यों की शिक्षा व्यवस्था का भी अध्ययन किया है। इसके बाद नीति का प्रारूप तैयार किया गया है। इसमें पढ़ाई को तीन चरणों में बांटा गया है। पहला चरण पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा से कक्षा दो तक, दूसरा कक्षा तीन से पांच तक और तीसरा कक्षा छह से 12वीं तक होगा। इन तीनों चरणों में बच्चों की मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को पढ़ाई से जोड़ने की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

नीति में बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने पर भी ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में पढ़ाई के साथ कंप्यूटर और डिजिटल माध्यमों की जानकारी भी जरूरी है। शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए, जिससे बच्चों को आगे की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के दौरान परेशानी नहीं हो। बैठक में शिक्षा नीति के अलग-अलग बिंदुओं पर चर्चा की गई।(साभार सोशल मीडिया)

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