(भोपाल,म.प्र.)06सितंबर,2026.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने शिक्षक दिवस के अवसर पर 33 शिक्षकों को सम्मानित किया। इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा ऑफलाइन मोड में होगी।
‘हमारी सरकार शिक्षकों के लिए जो बेहतर हो सकता है, ऐसे सभी जरूरी निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (The Teacher Eligibility Test-TET) ऑफलाइन मोड पर होगी। शिक्षा विभाग के आधार पर शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए हम प्रयास कर रहे हैं। हमारे शासकीय स्कूल, प्राइवेट स्कूलों से बेहतर होंगे।’ टीईटी को लेकर यह बड़ी घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर को की। वे भोपाल की आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में शिक्षक दिवस पर आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उससे पहले उन्हें एनसीसी कैडेट्स द्वारा ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। शिक्षक सम्मान समारोह में चयनित 33 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
उक्त सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की गौरवशाली गुरुकुल और गुरु-शिष्य परंपरा दुनिया में सबसे प्राचीन है। भारत की मंशा कभी किसी देश को अधीन करने की नहीं रही। हम वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से मानवता को बढ़ाने के लिए कार्य करते आए हैं। प्राचीन काल में भारत ने तक्षशिला, नालंदा और विक्रमजीत शिला विश्वविद्यालयों के माध्यम से दुनियाभर के विद्यार्थियों को शिक्षित किया। वर्तमान समय ऐसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत शांति और स्थिरता के साथ अर्थव्यवस्था की मजबूती की ओर बढ़ रहा है और दुनिया भारत की ओर बड़ी आशा के साथ देख रही है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भारत ने गुट निरपेक्ष नीति अपनाई थी और वह समय आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के अलग-अलग शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों से पूरे सम्मान के साथ मुलाकात और चर्चा करते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुनिया में देश का मान निरंतर बढ़ रहा है। इसके पीछे गुरु की महिमा है, क्योंकि जहां गुरूर खत्म होता है, जहां गुण शुरू होता है, वहीं गुरु खड़ा होता है। देश का नक्शा कागजों पर बनता है, लेकिन देश की किस्मत हमारे गुरुजन कक्षाओं में बनाते हैं। हमारे शिक्षक और गुरुजन इन कक्षाओं के अधिपति हैं। शिक्षक कई पीढ़ियों तक अपने शिष्य की प्रगति से आनंदित होता है। उसे जीवन में सबसे अधिक गर्व तब महसूस होता है, जब वो शिष्य को स्वयं से आगे बढ़ते हुए देखता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सभी शिक्षकों की मेहनत का सम्मान करती है। जब बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम सामने आते हैं तो इनकी मेरिट लिस्ट में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे हमारे शासकीय स्कूलों के होते हैं, जो शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिश्रम के कारण वहां तक पहुंच पाते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ऐसी है, जहां भगवान श्रीकृष्ण स्वयं शिक्षा ग्रहण करने के लिए उज्जैन के सांदीपनि आश्रम आए थे। जहां उन्होंने 64 कलाएं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सांदीपनि ने अपने शिष्य को जगद्गुरु की उपाधि दी। उन्होंने अपने शिष्य में भविष्य का पुरुषार्थ और पराक्रम देख लिया था। इसी प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने बाल्यकाल में प्रभु श्रीराम और उनके भाइयों में पराक्रम देखा था। उन्होंने कहा कि वे राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए और श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनाया।
मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 में आज प्रदेश के 33 शिक्षकों का सम्मान हुआ है। भारत के दूसरे राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्म जयंती के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देता हूं। यह आयोजन हमारे शिक्षकों को नमन करने का अवसर है, जो ज्ञान और संस्कार का देश का भविष्य गढ़ रहे हैं। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा को नए भारत की शक्ति बनाने का संकल्प राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में लिया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों से अनुरोध है कि भारत को महाशक्ति बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। उसे वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप अपग्रेड और इनोवेट करने की आवश्यकता है। बच्चों को उनकी रुचि के विषय चुनने का अवसर दिया जाए। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को खोजें और उसे आगे बढ़ने में सहयोग करें।(साभार एजेंसी)
