(चंडीगढ़,पंजाब)28अक्टूबर 2026
सतलुज, रावी और व्यास के पानी को लेकर पंजाब और राजस्थान के बीच दशकों पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। पंजाब सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्ताव पारित कर राजस्थान से नहरी पानी के बदले 1.44 लाख करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांगी है।
सदन में सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने प्रस्ताव पेश किया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि आजादी से पहले हुए समझौते के तहत राजस्थान 1960 तक पंजाब को पानी की रॉयल्टी देता था। अब राजस्थान मुफ्त में पानी लेकर उससे आर्थिक मुनाफा कमा रहा है, जबकि पंजाब पानी की कमी से जूझ रहा है। यह ऐसे ही है जैसे हमसे कच्चा माल मुफ्त में ले लिया जाए।
मुख्यमंत्री मान ने सख्त लहजे में कहा कि पंजाब अपने पानी की एक-एक बूंद के लिए लड़ेगा, चाहे लड़ाई अदालत में लड़नी पड़े या सड़क पर।
पंजाब सरकार का तर्क है कि सतलुज, रावी और व्यास तीनों नदियां राजस्थान की सीमा से नहीं गुजरतीं, इसलिए राजस्थान रिपेरियन स्टेट नहीं है। सरकार ने केंद्र से भी अपील की है कि भविष्य में राजस्थान से रॉयल्टी का भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।
वहीं राजस्थान ने इस मांग को असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया है। राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा था कि पानी पर किसी एक राज्य का व्यापारिक हक नहीं बनता।
राजस्थान का कहना है कि 1920 में यह समझौता ब्रिटिश हुकूमत, बहावलपुर और बीकानेर रियासत के बीच हुआ था, जिसमें बीकानेर की 5 लाख एकड़ जमीन को पानी देना तय हुआ था। उस समय फीस भी ब्रिटिश सरकार को दी जाती थी, पंजाब को नहीं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब में अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को उठाने के पीछे चुनावी रणनीति भी हो सकती है।(साभार एजेंसी)
