हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन से 454 सड़कें और 861 बिजली ट्रांसफार्मर ठप

Himanchal

(शिमला,हिमाचल प्रदेश)08अगस्त,2025.

हिमाचल प्रदेश में बारिश से कुछ राहत मिली, लेकिन दुश्वारियां बरकरार हैं। राज्य में जगह-जगह भूस्खलन से सैकड़ों सड़कों सहित बिजली और पेयजल की आपूर्ति ठप है। गुरुवार शाम तक राज्य में दो नेशनल हाईवे सहित 454 सड़कें बंद रहीं। 861 बिजली ट्रांसफार्मर व 244 जल आपूर्ति योजनाएं भी प्रभावित हैं। मंडी जिले में सबसे अधिक 245 सड़कें व 228 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं। कांगड़ा जिले में 120 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हैं। वहीं किन्नौर के निगुलसरी के पास बुधवार को चलती बाइक पर पहाड़ी से पत्थर गिर गए। इससे बाइक सवार सड़क पर गिर गया। हालांकि, उसे कोई चोट नहीं आई।

शिमला में जगह-जगह पेड़ गिरे
शिमला में शैलेडे स्कूल के पास विज्ञान प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन विभाग के कार्यालय की छत पर पेड़ गिर गया। इससे छत को नुकसान पहुंचा है। वहीं कनलोग के पास खलीनी-टूटीकंडी बाईपास पर भी एक पेड़ गिर गया। वहीं बुधवार को रामपुर में दो और कुल्लू जिले के निरमंड खंड की रहाणू पंचायत के उर्दू गांव में एक जगह नौणी नाले में बादल फटने से अफरातफरी मच गई। रामपुर में रात 10:30 बजे दो जगह बादल फटे। डंसा के शांदल नाले में बादल फटने से बाढ़ आ गई। तकलेच के दर्शन नाले में भी बादल फटने से नोगली खड्ड में जलस्तर बढ़ गया। दरशल में सड़क को क्षति पहुंची है।

राज्य के कई भागों में बरसेंगे बादल:
बीती रात को श्री नयना देवी में 92.6, रायपुर मैदान 81.6, पच्छाद 75.1, बीबीएमबी 73.0, ओलिंडा 67.6, कांगड़ा 62.5, धर्मशाला 42.5, नाहन 32.6, कसौली, 32.5, देहरा गोपीपुर 31.4, नंगल डैम 26.2 व मुरारी देवी में 25.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। माैसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से राज्य के कई भागों में 13 अगस्त तक बारिश का दाैर जारी रहने का पूर्वानुमान है। 7 अगस्त को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। 8 और 9 अगस्त को अनेक स्थानों पर, जबकि 10 से 13 अगस्त तक अधिकांश स्थानों पर बारिश की संभावना है। 10-11 अगस्त को ऊना, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी व सोलन जिले में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 7,8,9,12 व 13 अगस्त को कुछ स्थानों के लिए येलो अलर्ट है।
वहीं अगले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है।

मानसून में अब तक 2,084 कच्चे-पक्के घर क्षतिग्रस्त
प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 6 अगस्त तक 199 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 304 लोग घायल हुए हैं। 36 लोग अभी भी लापता हैं। इस दाैरान 86 लोगों की सड़क हादसों में माैत हुई है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 2,084 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई है। 1,690 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,570 पालतु पशुओं की माैत हुई है। नुकसान का कुल आंकड़ा 1,90,550.45 लाख रुपये पहुंच गया है।

भूस्खलन से बंद चक्कीमोड में शुरू हुई वाहनों की आवाजाही
परवाणू-शिमला फोरलेन में सुबह दोनों लेन ट्रैफिक के लिए खोल दी गई है। इससे पहले रातभर यहां पर पत्थर और मिट्टी गिरती रही। सुबह फोरलेन निर्माण कंपनी ने मशीनों से मिट्टी और पत्थर हटाकर फोरलेन की दोनों लेन वाहनों के लिए खोलीं। वहीं ऊना के पिपलू से बड़सर सड़क पर रछोह के समीप भारी बारिश के चलते गुरुवार सुबह भूस्खलन हुआ। इस कारण सड़क पर यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया है।

बड़ूही-सोहरी सड़क पर नीलकंठ महादेव मंदिर के पास भूस्खलन
उपमंडल के तहत आने वाली प्रमुख बड़ूही-सोहरी सड़क पर बुधवार देर रात हुई मूसलधार बारिश के चलते नीलकंठ महादेव मंदिर के पास भूस्खलन हो गया। बड़ी मात्रा में पहाड़ी से गिरे मलबे ने सड़क को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया। हलांकि, कुछ समय बाद सड़क को बहाल कर दिया गया। ग्राम पंचायत बड़ूही के प्रधान जगदीश राम ने बताया कि उन्होंने तुरंत लोक निर्माण विभाग को इसकी जानकारी दीऔर सड़क से मलबा हटाने के लिए कहा। लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता सुरेश कुमार का कहना है कि सड़क से मलबा हटा दिया गया है।

सड़क सुविधा नहीं होने से पालकी पर ले जाने पड़ रहे मरीज
बिलासपुर जिले के उपमंडल झंडूता के तहत ग्राम पंचायत घंडीर के गांव टप्पा दधोग में सड़क सुविधा नहीं होने से पालकी पर उठाकर मरीजों को अस्पताल ले जान पड़ रहा है। 25 वर्षों से ग्रामीण सड़क की मांग कर रहे हैं। मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को जहां एक तरफ जंगल के रास्ते तीन किलोमीटर का तो दूसरी ओर डेढ़ किलोमीटर खड्ड के रास्ते चलना पड़ता है। बरसात में इन लोगों की समस्या अधिक बढ़ जाती है। हाल ही में एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने बताया कि 1 अगस्त की रात के समय गर्भवती महिला को रात के समय अस्पताल पहुंचाया। वहीं 6 अगस्त को जब प्रसव के बाद उसे वापस लाया गया तो खड्ड के रास्ते पालकी के सहारे घर तक पहुंचाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि 25 वर्ष से वह सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुध लेने को तैयार नहीं है।

चुल्हड़ी गांव में भारी बारिश से गिरी मकान की दीवार, महिला घायल
चुल्हड़ी गांव में गुरुवार सुबह भारी बारिश से मकान की एक दीवार गिर गई। इसकी चपेट में आने से एक महिला घायल हो गई। गांव की निवासी चंपा देवी पत्नी खरेतीं राम सुबह करीब 7:00 बजे अपने रसोईघर में खाना बना रही थीं, तभी साथ लगते एक मकान की दीवार भरभराकर गिर गई। हादसे में चंपा देवी मलबे और पत्थरों के नीचे दब गईं। गांववासियों ने तुरंत महिला को मलबे से बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए महिला को पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया। हादसे में महिला एक बाजू और टांग टूट गई। पंचायत प्रधान कर्ण सिंह ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता और राहत प्रदान करने की अपील की है।

41 घंटों बाद बहाल हुआ चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे, डवाड़ा फ्लाईओवर को भारी क्षति
चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर दवाड़ा से झलोगी के बीच भारी बारिश के बाद हुई भूस्खलन की घटनाओं ने यातायात को पूरी तरह से ठप कर दिया था। मंगलवार रात करीब 8:00 बजे बंद हुआ हाईवे लगभग 41 घंटे बाद गरुवार दोपहर 1:00 बजे एक तरफा यातायात के लिए बहाल कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, दवाड़ा फ्लाईओवर के पास अचानक भारी चट्टानें गिर गईं, वहीं झलोगी तक करीब चार अलग-अलग स्थानों पर स्लाइडिंग होती रही, जिससे सैकड़ों वाहन दोनों ओर फंस गए थे। करीब 150 मालवाहक वाहन मार्ग में जगह-जगह फंसे रहे, जिससे जरूरी सामानों की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। सबसे ज्यादा प्रभावित हणोगी टनल क्षेत्र रहा, जहां फंसे ड्राइवरों और यात्रियों को रात टनल के भीतर ही गुजारनी पड़ी। राहत की बात यह रही कि स्थानीय प्रशासन और हणोगी माता मंदिर समिति के सहयोग से फंसे हुए लोगों को भोजन की व्यवस्था करवाई गई। सबसे बड़ी क्षति डवाड़ा फ्लाईओवर को पहुंची है। फ्लाईओवर पर भारी चट्टानें गिरने से इसकी संरचना को गंभीर नुकसान हुआ है। फ्लाईओवर अपनी मूल स्थिति से करीब तीन फीट खिसक गया है, जिसके कारण इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

भूस्खलन से काशापाट पंचायत की सड़क का कई मीटर हिस्सा गायब
उपमंडल की दुर्गम पंचायत काशापाट सड़क भी बनैड़ा के पास बुधवार रात को भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गई। सड़क का कई मीटर हिस्सा गायब हो गया और सड़क दो हिस्सों में बंट गई। ग्रामीणों को पैदल आवाजाही के लिए भी जगह नहीं बची है। भूस्खनल वाली जगह खाई में तब्दील हो गई है। इसलिए डंगा निर्माण में भी काफी समय लग सकता है। क्षेत्र के बागवानों को सेब सीजन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। क्षेत्र में हजारों सेब पेटियों को मंडी तक पहुंचाना बागवानों के लिए चुनौती बन जाएगा। सड़क बाधित होने से काशा, छलटा और शरनाल गांव का संपर्क कट चुका है। पंचायत प्रधान पुष्पा सनाटू ने कहा कि भारी बारिश के कारण काशापाट सड़क बनैड़ा में पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है। वहीं एक सप्ताह बाद सेब सीजन भी शुरू होना है। उन्होंने सरकार, प्रशासन और लोनिवि से शीघ्र समस्या का समाधान करने की मांग उठाई है।

टूटीकंडी में भूस्खलन से रिहायशी मकानों को खतरा, ईदगाह कॉलोनी में धंसा रास्ता
टूटीकंडी वार्ड के पांजड़ी क्षेत्र में भूस्खलन से कई मकानों के लिए खतरा पैदा हो गया है। रिहायशी मकानों के ठीक ऊपर पहाड़ी से लगातार मलबा गिर रहा है। इससे निचली ओर बने मकानों को खतरा पैदा हो गया है। उप महापौर उमा कौशल ने गुरुवार को अधिकारियों के साथ इस क्षेत्र का दौरा किया। साथ ही स्थानीय लोगों से भी बात की। लोगों ने कहा कि कुछ दिन पहले केबल बिछाने के लिए यहां पहाड़ी पर खुदाई की गई थी। अब बारिश होने के बाद यह पहाड़ी दरकने लगी है। बड़ी-बड़ी चट्टाने ऊपर से गिरकर निचली ओर बने मकानों तक पहुंच रही है। उप महापौर ने मौके पर निगम अधिकारियों को इस बारे में दिशा-निर्देश जारी किए।(साभार एजेंसी)

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