(लखनऊ,UP)13जनवरी,2026.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जन्म प्रमाणपत्र जारी करने में भ्रष्टाचार पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने जन्मतिथि में 11 वर्षों की हेराफेरी, जालसाजी और धोखाधड़ी के मामले में प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को संबंधित व्यक्ति और ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन व न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी शिवशंकर पाल की याचिका पर दिया है।
याची ने पासपोर्ट पर जन्मतिथि 1994 से बदलकर 2005 करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। कोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच में पाया कि याची ने हाईस्कूल की परीक्षा वर्ष 2011 में उत्तीर्ण की थी, जबकि हाईस्कूल प्रमाणपत्र में उसकी जन्मतिथि 11 जुलाई 1994 दर्ज है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि 2005 में जन्मा व्यक्ति छह वर्ष की उम्र में हाईस्कूल परीक्षा में कैसे शामिल हो गया।
इसके अलावा, पासपोर्ट आवेदन के समय जमा आधार कार्ड में भी जन्मतिथि 1994 थी, जबकि बाद में संलग्न आधार कार्ड की प्रति में जन्मतिथि 2005 दर्शायी गई। कोर्ट ने नवंबर 2025 में ग्राम पंचायत की ओर से जारी जन्म प्रमाणपत्र पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। (साभार एजेंसी)
