(जयपुर,राजस्थान)18अक्टूबर,2026
छोटे बच्चों की देखरेख और उनकी सुरक्षा के दृष्टिगत राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्य के न्यायिक परिसरों में शिशु गृह (क्रेच) स्थापित करने के लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। यह व्यवस्था जोधपुर, जयपुर, सभी जिला मुख्यालयों तथा अन्य अदालती परिसरों में लागू होगी। इस पहल से अदालतों में आने वाले वकीलों, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और वादकारियों को अपने छोटे बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की चिंता से बड़ी राहत मिलेगी। कार्यस्थल पर शिशु गृह की उपलब्धता से लोग निश्चिंत होकर अपना कामकाज पूरा कर सकेंगे।
प्रवेश प्रक्रिया और निर्धारित शुल्क:
न्यायिक परिसरों में खुलने वाले इन शिशु गृहों में 6 महीने से लेकर 8 साल तक की आयु के बच्चों को प्रवेश मिलेगा। प्रवेश के लिए ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की नीति अपनाई जाएगी, जिसमें कम उम्र के छोटे बच्चों को दाखिले में विशेष प्राथमिकता मिलेगी। हाईकोर्ट प्रशासन ने क्रेच के उपयोग के लिए स्पष्ट शुल्क संरचना भी निर्धारित कर दी है। इसके तहत नियमित प्रवेश लेने वाले बच्चों के लिए 1000 रुपये का एकमुश्त शुल्क और 1500 रुपये मासिक शुल्क तय किया गया है। वहीं, जो लोग केवल आकस्मिक या अस्थायी उपयोग के लिए बच्चे को शिशु गृह में छोड़ना चाहते हैं, उनके लिए 100 रुपये प्रतिदिन का शुल्क देना होगा।
सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सुविधाएं:
शिशु गृहों में बच्चों की पूर्ण सुरक्षा और उचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। सभी क्रेच परिसरों में सतत निगरानी के उद्देश्य से सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। किसी भी बच्चे को केवल अधिकृत व्यक्ति को ही सौंपने की सख्त व्यवस्था लागू होगी, ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही, बच्चों के अनुकूल शौचालय, शुद्ध पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा किट की उपलब्धता अनिवार्य रखी गई है। बच्चों के भोजन और दूध को सुरक्षित रखने तथा गर्म करने के लिए माइक्रोवेव एवं रेफ्रिजरेटर से सुसज्जित पैंट्री की सुविधा भी इन केंद्रों में मिलेगी।(साभार एजेंसी)
