(चंडीगढ़,हरियाणा)25अक्टूबर,2026.
हरियाणा में आंगनवाड़ी केंद्रों की तस्वीर अब बदलने जा रही है। अब यहां बच्चे किताबी बोझ के बजाय खेल-खेल में सीखेंगे। प्रदेश सरकार ने 3 से 6 वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ‘आगे बढ़े बचपन’ पहल की शुरुआत की है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि “प्रदेश में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ‘आगे बढ़े बचपन’ पहल के तहत खेल-आधारित शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। आंगनवाड़ी केंद्रों में शिक्षण-अधिगम सामग्री के माध्यम से बच्चों को रंगों, आकारों, गिनती और रोचक गतिविधियों से सीखने के अवसर मिल रहे हैं।”
मंत्री जी ने कहा कि इस पहल से बच्चों के भाषा एवं संवाद कौशल, तार्किक सोच, समस्या समाधान की क्षमता, आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा तथा वे विद्यालय में प्रवेश के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे। हर बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकता है।
क्या है ‘आगे बढ़े बचपन’ मॉडल?
इस पहल के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों को अब सिर्फ पोषण केंद्र नहीं, बल्कि प्री-स्कूल लर्निंग सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए केंद्रों पर विशेष शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM Kits) उपलब्ध कराई गई है।
इन किट में रंग-बिरंगे चार्ट, आकार वाले ब्लॉक्स, गिनती के मोती, कहानी की किताबें, पहेलियां और स्थानीय खिलौने शामिल हैं। बच्चा इन्हीं के जरिए रंगों की पहचान, आकार, छोटी-बड़ी गिनती सीखेगा।
NEP 2020 से जुड़ा है विजन
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस लक्ष्य से जुड़ी है, जिसमें कहा गया है कि 3 से 8 साल की उम्र बच्चे के मस्तिष्क के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। अगर इस दौरान उसे खेल-आधारित, गतिविधि-आधारित शिक्षा मिले तो उसकी बुनियाद मजबूत होती है।
पहले अक्सर देखा जाता था कि आंगनवाड़ी से सीधे पहली कक्षा में जाने वाले बच्चे स्कूल से जुड़ नहीं पाते थे। अब इस खाई को पाटने की कोशिश है।
शिक्षिकाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण
इस योजना को सफल बनाने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि डांट-डपट कर नहीं, बल्कि कहानी, कविता, गीत और खेल के माध्यम से बच्चों को कैसे सिखाना है। हर गतिविधि के बाद बच्चे से सवाल पूछना, उसे बोलने के लिए प्रोत्साहित करना इस विधि का हिस्सा है।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हरियाणा का कोई भी बच्चा स्कूल शिक्षा से वंचित न रहे और आंगनवाड़ी से ही उसकी सीखने की ललक पैदा हो।(साभार सोशल मीडिया)
