(लखनऊ,UP)25अक्टूबर,2026
उत्तर प्रदेश को देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का हब बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा विजन पेश किया है। मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि वर्ष 2030 तक प्रदेश में 05 गीगावाट (GW) Data Centre क्षमता विकसित की जाएगी। इसके लिए प्रदेश में 05 बड़े Data Centre Clusters का सशक्त नेटवर्क तैयार करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि Data की शक्ति से उत्तर प्रदेश में Investment, Innovation, Industry और Employment के नए अवसर सृजित हों। सरकार का मानना है कि डेटा सेंटर सिर्फ सर्वर रखने की जगह नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था का इंजन हैं।
क्या है 5 GW का प्लान?
सरकार के इस विजन के तहत नोएडा-ग्रेटर नोएडा को पहला बड़ा क्लस्टर बनाया गया है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में हजारों करोड़ के निवेश से कई हाइपर-स्केल डेटा सेंटर बन रहे हैं। इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में भी नए क्लस्टर विकसित करने की योजना है। 5 गीगावाट क्षमता का मतलब है कि यूपी अकेले देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अपने पास रखेगा।
निवेश और रोजगार को मिलेगा बूस्ट
अभी तक उत्तर प्रदेश की डेटा सेंटर नीति के तहत 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। इसमें Hiranandani Group की Yotta, Adani Enterprises, NTT Japan, ST Telemedia Global Data Centres जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
एक गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित होने पर लगभग 15 हजार प्रत्यक्ष और 50 हजार अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होते हैं। इस लिहाज से 2030 तक इस सेक्टर में करीब 3 लाख युवाओं को हाई-स्किल रोजगार मिलने की उम्मीद है। इसमें क्लाउड इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, नेटवर्क इंजीनियर जैसे पद शामिल होंगे।
क्यों यूपी बन रहा है पहली पसंद?
मुख्यमंत्री जी ने बताया कि यूपी के पास तीन बड़ी ताकतें हैं – 24 घंटे निर्बाध बिजली, सबसे बड़ा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क और देश का सबसे बड़ा डेटा उपभोक्ता बाजार। प्रदेश सरकार ने डेटा सेंटर नीति में बिजली पर विशेष सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट और जमीन सस्ते दर पर देने का प्रावधान किया है।
4-I फॉर्मूला से बदलेगी तस्वीर
सीएम योगी के इस 4-I फॉर्मूले – Investment, Innovation, Industry और Employment पर प्रदेश में काम हो रहा है। डेटा सेंटर आने से यूपी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए भी रास्ता खुलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब डेटा भारत में ही स्टोर होगा तो डेटा सुरक्षा भी बढ़ेगी और डिजिटल इंडिया का सपना और मजबूत होगा। इस विजन से उत्तर प्रदेश न सिर्फ उत्तर भारत का बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का डेटा हब बनने की ओर अग्रसर है।(साभार सोशल मीडिया)
