सीएम सैनी बोले-‘लागत कम,मुनाफा ज्यादा,यहीं असली इनोवेशन’

Hariyana

(चंडीगढ़,हरियाणा)24सितंबर,2026

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी बुधवार को कुरुक्षेत्र के लाडवा में सीआईआई के 5वें इनोवेटिव फार्मर्स मीट के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर लगाई कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया. इसके साथ ही प्रगतिशील किसानों से बातचीत की. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि “किसान की लागत घटे, मेहनत कम हो और फसल का लाभ बढ़े, वही तकनीक उसके लिए वास्तविक इनोवेशन है.”

इनोवेटिव फार्मर्स मीट: सीएम नायब सैनी ने कहा “किसी भी तकनीक की असली सफलता किसान के हिसाब-किताब की कॉपी में दिखाई देनी चाहिए. किसान के लिए वही तकनीक उपयोगी है, जो उसकी पहुंच में हो, आसानी से इस्तेमाल हो सके और जिसकी मरम्मत भी गांव के आसपास हो सके. इस इनोवेटिव फार्मर्स मीट की विशेषता यह है कि चर्चा बड़े शहरों या सभागारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सीधे किसानों के बीच ले जाया जा रहा है.”

‘जल और मिट्टी की सेहत के लिए तकनीक जरूरी’: मुख्यमंत्री ने कहा कि आज खेती के सामने मौसम की अनिश्चितता, पानी की बढ़ती कमी और मिट्टी की बिगड़ती सेहत जैसी गंभीर समस्याएं हैं. इसलिए ऐसी खेती की ओर बढ़ना होगा, जो बदलती परिस्थितियों का सामना कर सके और किसान की आय को बढ़ाए. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में धान और गेहूं की खेती का विशेष महत्व है।

किसानों से भूमि की जांच करवाने की अपील: सीएम ने कहा खेतों में धान की सीधी बुवाई, फसल के अनुसार सूक्ष्म सिंचाई और खेत को समतल करने जैसे उपाय उपयोगी हो सकते हैं. उन्होंने किसानों से अपनी भूमि की जांच करवाने और उसकी जरूरत के अनुसार खाद का उपयोग करने का आग्रह किया. फसल चक्र, जैविक पदार्थ और वैज्ञानिक सलाह से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को संभालने पर भी जोर दिया।

‘एक मशीन का लाभ अनेक किसानों तक पहुंचे’: मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटा किसान हर महंगी मशीन अकेले नहीं खरीद सकता. इसलिए किसान समूहों, सहकारी समितियों और किराये पर मशीन उपलब्ध कराने वाले केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है. एक मशीन का लाभ अनेक खेतों तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने कहा कि गांव के युवा मशीन चलाने, उसकी मरम्मत करने और खेती संबंधी सेवाएं देने का काम सीखें।

‘रोजगार के अवसर होंगे पैदा’: नायब सैनी ने फसल विविधीकरण पर भी विचार करने की बात कही. उन्होंने कहा कि जहां परिस्थितियां अनुकूल हों, वहां दलहन, तिलहन, सब्जियों, फलों और अन्य उपयुक्त फसलों की संभावनाएं देखनी चाहिए. मुख्यमंत्री ने उद्योगों से किसानों को गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा के मानकों का प्रशिक्षण देने तथा बेहतर बाजार से जोडऩे में सहयोग करने का आग्रह किया।

‘प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण और सहायता’: मुख्यमंत्री ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान कल्याण सरकार की प्राथमिकता है. सरकार किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और कृषि को तकनीक से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है. प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए पोर्टल पर लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण करवाया है. इनमें से 44 हजार एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए 23 हजार 930 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है.”

पराली के प्रबंधन पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाई: वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 20 हजार 727 एकड़ क्षेत्र पर प्राकृतिक खेती की गई. मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सोलर पंप लगाने के लिए किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है और अब तक 1 लाख 95 हजार सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि पराली के उचित प्रबंधन और गांठ बनाने के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है. अब तक 10 लाख किसानों को 907 करोड़ रुपये की राशि सब्सिडी के रूप में दी जा चुकी है।(साभार एजेंसी)

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