(देहरादून )07नवंबर,2026
परेड ग्राउंड में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के छह बहादुर बच्चों को प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार प्रदान किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से इन नन्हे वीरों को पदक और प्रशस्ति पत्र सौंपकर सम्मानित किया। पुरस्कार स्वरूप प्रत्येक विजेता बच्चे को 51-51 हजार रुपये की धनराशि डीबीटी के जरिए उनके बैंक खातों में भेजी गई।
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहली बार यह पुरस्कार शुरू किया गया है। प्रदेश भर से प्राप्त आवेदनों में से राज्य स्तर पर छह बच्चों का चयन किया गया था। इनमें चमोली जनपद से तीन बच्चे, जबकि चम्पावत, देहरादून और टिहरी गढ़वाल से एक-एक बच्चे को चुना गया है।
चमोली जिले के दिव्या, दीपिका और आरव सिंह को विद्यालय परिसर में भालू के हमले के समय दिखाए गए साहस के लिए यह सम्मान मिला। 22 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 9:30 बजे जीआईसी यूपीएस हरिशंकर, चमोली में एक भालू घुस आया था। भालू ने कक्षा 6 के छात्र आरव सिंह पर हमला कर दिया। आरव ने हिम्मत दिखाते हुए खुद को बचाने का प्रयास किया। तभी कक्षा 8 की छात्रा दिव्या ने बिना डरे भालू का पीछा किया और आरव को बचाकर सुरक्षित स्कूल भवन तक पहुंचाने में मदद की। वहीं दीपिका ने सूझबूझ दिखाते हुए नौ अन्य छात्रों को तुरंत कक्षा 7 के कमरे में ले जाकर सुरक्षित किया। तीनों ने कठिन समय में बहादुरी और समझदारी की मिसाल पेश की।
चम्पावत की कु. माया को उफनती नदी में डूब रही बच्ची की जान बचाने पर सम्मानित किया गया। 5 अगस्त 2025 को मूसलाधार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ गया था और एक बालिका तेज बहाव में बहने लगी थी। माया ने अपनी जान जोखिम में डालकर उसे धारा से खींचकर बाहर निकाला। इस दौरान माया खुद भी चोटिल हो गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक जीवन बचा लिया।
देहरादून की कु. आराध्या को बादल फटने जैसी आपदा में सतर्कता दिखाने के लिए पुरस्कार मिला। 2 जून 2026 की शाम भारी बारिश से मलबा और पानी तेजी से आने लगा। आराध्या ने खतरे को पहचानकर घर में मौजूद 17 लोगों को तुरंत चेताया, जिससे सभी सुरक्षित जगह पहुंच गए। उन्होंने तीन साल की एक मासूम को भी तेज पानी के बहाव से बचा लिया। उनकी समझदारी से बड़ा हादसा टल गया।
टिहरी गढ़वाल की कु. श्वेता को सड़क पर बुजुर्ग की जान बचाने के लिए सम्मानित किया गया। 30 जनवरी 2025 को एक बुजुर्ग लाठी के सहारे सड़क पर चल रहे थे, तभी सामने से तेज रफ्तार वाहन आया। श्वेता ने फुर्ती दिखाते हुए बुजुर्ग का हाथ पकड़ा और उन्हें किनारे कर सुरक्षित किया। उनकी तत्परता से बुजुर्ग की जान बच सकी।
इस पुरस्कार का उद्देश्य ऐसे बच्चों को सम्मानित करना है जिन्होंने असाधारण हिम्मत और सूझबूझ दिखाई। सरकार की इस पहल से न केवल इन बच्चों को पहचान मिलेगी, बल्कि अन्य बच्चे भी मुश्किल हालात में साहस, संवेदन और जिम्मेदारी दिखाने के लिए प्रेरित होंगे।(साभार सू वि)
