(भोपाल,म.प्र.)07नवंबर,2026
मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है। सोलहवीं विधानसभा का 12वां सत्र 7 दिसंबर से 11 दिसंबर 2026 तक चलेगा। राज्यपाल के आदेश के अनुपालन में विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार को सत्र आहूत करने संबंधी अधिसूचना जारी की है।
सचिवालय के अनुसार पांच दिन के इस सत्र में शासकीय कामकाज के साथ-साथ अशासकीय कार्य भी संपादित किए जाएंगे। विधायकों से अशासकीय विधेयक और संकल्प निर्धारित समय-सीमा में भेजने को कहा गया है। अशासकीय विधेयकों की सूचनाएं 11 नवंबर तक और अशासकीय संकल्पों की सूचनाएं 26 नवंबर तक विधानसभा सचिवालय में जमा करनी होंगी। इसके अलावा स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और नियम 267-क के तहत सूचनाएं 1 दिसंबर से स्वीकार की जाएंगी। विधायक ये सूचनाएं सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक कार्यालयीन समय में जमा कर सकेंगे।
सरकार इस सत्र में अनुपूरक बजट समेत कई विधेयक और अन्य विधायी कार्य ला सकती है। यह 16वीं विधानसभा का 12वां सत्र होगा, जिसमें प्रश्नकाल सहित अन्य संसदीय कार्य भी संपादित होंगे।
सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्षी कांग्रेस जहरीली शराब से मौतों और अवैध शराब कारोबार के कारण पुलिस निरीक्षक की मौत, खाद की किल्लत और किसानों की परेशानी, बिना सूचना बिजली कटौती और सरकारी नौकरियों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलने जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। अलग-अलग विभागों के चयनित उम्मीदवार लंबे समय से नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और विपक्ष इन आंदोलनों के जरिए सरकार से जवाब मांग सकता है।
वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शीतकालीन सत्र सिर्फ पांच दिन रखे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से मौतें, किसानों की बदहाली, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ता कर्ज और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा के लिए पांच दिन पर्याप्त नहीं हैं। इससे पहले मानसून सत्र भी पांच दिन का बुलाया गया था, जिसे तीन दिन में ही समाप्त कर दिया गया था। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के विधायक सात करोड़ से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए सदन की अवधि घटने की बजाय बढ़नी चाहिए। कांग्रेस विधायक दल सदन में जनता से जुड़े सभी मुद्दे मजबूती से उठाएगा।(साभार एजेंसी)
