(भोपाल,म.प्र.)07नवंबर,2026
सर्दी का मौसम शुरू होते ही खांसी, जुकाम और बुखार को आम बात समझकर नजरअंदाज करना गंभीर रूप से भारी पड़ सकता है। मौसम बदलने के साथ ही सांस संबंधी वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं और यह संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकता है। इसी को देखते हुए एम्स भोपाल ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। संस्थान का कहना है कि समय पर टीकाकरण और शुरुआती लक्षणों की पहचान गंभीर संक्रमण से बचने के लिए सबसे अहम है।
एम्स भोपाल के चिकित्सकों के अनुसार, सर्दियों में तापमान गिरने और नमी में बदलाव के कारण लोग ज्यादा समय बंद कमरों में बिताते हैं। कम वेंटिलेशन वाली जगहों पर लोगों के एक-दूसरे के संपर्क में आने से इन्फ्लूएंजा सहित अन्य श्वसन वायरसों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में सामान्य सा दिखने वाला संक्रमण भी कुछ लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
किन लोगों को है ज्यादा खतरा
डॉक्टरों ने बताया कि बुजुर्ग, छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाओं को संक्रमण को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति, दमा, सीओपीडी, डायबिटीज और हृदय रोग से पीड़ित लोगों में भी संक्रमण का जोखिम अधिक रहता है। जिन लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनमें संक्रमण पहले से मौजूद बीमारी को और बिगाड़ सकता है और गंभीर निमोनिया का कारण बन सकता है।
फ्लू का टीका हर साल लगवाएं
एम्स भोपाल ने बचाव के उपाय के तौर पर हर साल इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाने की सलाह दी है। खासकर हाई रिस्क ग्रुप में आने वाले लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को टीकाकरण को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इसके साथ ही उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुए निमोनिया से बचाव का टीका लगवाने के लिए भी चिकित्सक से सलाह लेने को कहा गया है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
इन्फ्लूएंजा होने पर अचानक तेज बुखार, कंपकंपी, सिरदर्द, बदन में दर्द, गले में खराश, खांसी और बहुत अधिक थकान महसूस हो सकती है। यदि तेज बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द होने लगे, रोगी भ्रम की स्थिति में चला जाए या होंठ नीले पड़ने लगें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऑक्सीजन सेचुरेशन का कम होना भी खतरे का गंभीर संकेत है।
मास्क, स्वच्छ हवा और साफ-सफाई है जरूरी
संक्रमण से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाली और कम हवादार जगहों पर सही तरीके से फिट होने वाला मास्क पहनने, घर के कमरों में ताजी हवा की आवाजाही बनाए रखने और समय-समय पर हाथ धोने की सलाह दी गई है। खांसते या छींकते समय मुंह को ढंकना, धूम्रपान और घर के भीतर के प्रदूषण से बचना, संतुलित भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना और भरपूर नींद लेना भी बचाव में मदद करता है।
वायरल में खुद से एंटीबायोटिक लेने से बचें
एम्स ने स्पष्ट किया है कि एंटीबायोटिक दवाएं वायरल संक्रमण पर कारगर नहीं होती हैं। इनका सेवन केवल डॉक्टर के परामर्श पर ही करना चाहिए। इन्फ्लूएंजा के मामले में एंटीवायरल दवाएं यदि शुरुआती दौर में शुरू की जाएं तो अधिक फायदा देती हैं। अस्पताल में भर्ती और हाई रिस्क वाले मरीजों को देर से उपचार शुरू होने पर भी इससे लाभ मिल सकता है। इसलिए लक्षणों के और बिगड़ने का इंतजार किए बिना समय पर चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।(साभार एजेंसी)
